नए रूप रंग के साथ अपने प्रिय ब्‍लॉग पर आप सबका हार्दिक स्‍वागत है !

ताज़ा प्रविष्ठियां

संकल्प एवं स्वागत्

ज्योतिष निकेतन संदेश हिन्‍दी की मासिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित लेख इस ब्लॉग पर जीवन को सार्थक बनाने हेतु आपके लिए समर्पित हैं। आप इसके पाठक हैं, इसके लिए हम आपके आभारी रहेंगे। हमें विश्‍वास है कि आप सब ज्योतिष, हस्तरेखा, अंक ज्योतिष, वास्तु, अध्यात्म सन्देश, योग, तंत्र, राशिफल, स्वास्थ चर्चा, भाषा ज्ञान, पूजा, व्रत-पर्व विवेचन, बोधकथा, मनन सूत्र, वेद गंगाजल, अनुभूत ज्ञान सूत्र, कार्टून और बहुत कुछ सार्थक ज्ञान को पाने के लिए इस ब्‍लॉग पर आते हैं। ज्ञान ही सच्चा मित्र है और कठिन परिस्थितियों में से बाहर निकाल लेने में समर्थ है। अत: निरन्‍तर ब्‍लॉग पर आईए और अपनी टिप्‍पणी दीजिए। आपकी टिप्‍पणी ही हमारे परिश्रम का प्रतिफल है।

शुक्रवार, अप्रैल 08, 2011

उतावला होवे बावला



    सभी को बहुत जल्‍दी रहती है। जिस कार्य में जितना समय लगना चाहिए उतना लगाने का धैर्य ही नहीं है। अभीष्‍ट तुरत-फुरत पा लेना चाहते हैं। तुरत-फुरत के चक्‍कर में कई मार्ग गलत मार्ग पर चल पड़ते हैं जो आगे जाकर अनिष्टिकर होता है। सुमार्ग यही है कि धैर्य सहित सदाचरण का पालन करें और निज दुर्बलताओं को एक-एक करके दूर हटाएं। उतावलापन, जल्‍दबाजी या अधीरता कई बार अधिक पाने की चेष्‍टा सबकुछ गवांने का कारण बन जाती है।
    कोई भी कार्य करने की एक प्रक्रिया होती है जिसके अनुपालन से ही वह कार्य सम्‍पन्‍न होता है। जल्‍दबाजी में कार्य का परिणाम उल्‍टा ही आता है क्‍योंकि इसमें कार्य व्‍यवस्थित ढंग से आदर्श प्रक्रिया के अनुरूप नहीं होता है और सबकुछ अव्‍यवस्थित हो जाता है, इससे व्‍यर्थ का विलम्‍ब भी होता है और कार्य का परिणाम मनोनुकूल नहीं होता है।
    मूलत:  उतावलापन, जल्‍दबाजी या अधीरता  कमजोर मन की विक्षिप्‍तता है। मन की इस दुर्बलता से बचना चाहिए और कार्य व्‍यवस्थित ढंग से करना चाहिए। जल्‍दबाजी में जब कार्य करने के बाद बनता नहीं दिखाई देता है तो उसे बीच में छोड़कर दूसरा कार्य प्रारम्‍भ कर देते हैं, इसमें धन, समय और प्रयास व्‍यर्थ होते हैं। प्रत्‍येक कार्य समय, श्रम और धैर्य के सहयोग से होता है। जब तक तीनों का परस्‍पर उचित अनुपात में योगदान नहीं होता तब तक मनोनुकूल कार्य नहीं बनता है। कहावत भी है कि उतावला होवे बावला। उतावलापन बुद्धि को अस्थिर बनाता है और जीवन को अव्‍यवस्थित। अत: धैर्य, श्रम एवं समय का एक उचित अनुपात रखकर ही कार्य करेंगे तो भरपूर सफलता मिलेगी और परिणाम भी मनोनुकूल होगा।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्‍पणी देकर अपने विचारों को अभिव्‍यक्‍त करें।

पत्राचार पाठ्यक्रम

ज्योतिष का पत्राचार पाठ्यक्रम

भारतीय ज्योतिष के एक वर्षीय पत्राचार पाठ्यक्रम में प्रवेश लेकर ज्योतिष सीखिए। आवेदन-पत्र एवं विस्तृत विवरणिका के लिए रु.50/- का मनीऑर्डर अपने पूर्ण नाम व पते के साथ भेजकर मंगा सकते हैं। सम्पर्कः डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर' ज्योतिष निकेतन 1065/2, शास्त्री नगर, मेरठ-250 005
मोबाईल-09719103988, 01212765639, 01214050465 E-mail-jyotishniketan@gmail.com

पुराने अंक

ज्योतिष निकेतन सन्देश
(गूढ़ विद्याओं का गूढ़ार्थ बताने वाला हिन्दी मासिक)
स्टॉक में रहने तक मासिक पत्रिका के प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, षष्‍ठ एवं सप्‍तम वर्ष के पुराने अंक 1920 पृष्ठ, सजिल्द, गूढ़ ज्ञान से परिपूर्ण और संग्रहणीय हैं। सातों पुस्तकें पत्र लिखकर मंगा सकते हैं। आप रू.1950/-का ड्राफ्‌ट या मनीऑर्डर डॉ.उमेश पुरी के नाम से बनवाकर ज्‍योतिष निकेतन, 1065, सेक्‍टर 2, शास्‍त्री नगर, मेरठ-250005 के पते पर भेजें अथवा उपर्युक्त राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अकाउंट नं. 32227703588 डॉ. उमेश पुरी के नाम में जमा करा सकते हैं। पुस्तकें रजिस्टर्ड पार्सल से भेज दी जाएंगी। किसी अन्य जानकारी के लिए नीचे लिखे फोन नं. पर संपर्क करें।
ज्‍योतिष निकेतन, मेरठ
0121-2765639, 4050465 मोबाईल: 09719103988

विज्ञापन