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ज्‍योतिष निकेतन सन्‍देश

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ज्‍योतिष निकेतन सन्‍देश भारत की हिन्‍दी में गूढ़ विद्याओं का गूढ़ार्थ बतलाने वाली प्रमुख पत्रिकाओं में सर्वाधिक लोकप्रिय पत्रिका है। इसका वितरण ज्‍योतिष निकेतन मेरठ के माध्यम से भारत भारत भर में किया जा रहा है। यह पत्रिका बाजार में उपलब्‍ध नहीं है, इसलिए यह पत्रिका सीधे इसके सदस्‍यों के घर तक डॉक द्वारा पहुंचायी जाती है। इसे बहुत रुचि के साथ परिवार के सभी सदस्य पढ़ते हैं।
हमें विश्वास है कि आप भी ज्‍योतिष निकेतन सन्‍देश सदस्‍य बनकर इसमें प्रकाशित ज्ञान का लाभ उठाएंगे। इस पत्रिका को एक बार पढ़कर आप इसका कोई भी अंक पढ़ने से स्‍वयं को वंचित रखना नहीं चाहेंगे। ज्‍योतिष निकेतन सन्‍देश के सभी स्तंभों को पाठकों द्वारा पसन्‍द किया जाता है।
ज्‍योतिष निकेतन सन्‍देश में नक्षत्र ज्ञान, हस्‍तरेखा ज्ञान, उपनिषदों का अमृत, प्राचीन ज्‍योतिष ग्रन्‍थ, योगामृत, स्‍वास्‍थ्‍य चर्चा, वास्‍तु ज्ञान, सरल तन्‍त्र विद्या, आपका यह मास, मासिक व्रतपर्व, कार्टून, बोधकथा, वेद गंगाजल, मनन सूत्र, अनुभूत ज्ञानसूत्र, हास्‍य योग(कार्टून), अनुभूत प्रयोग एवं बहुत कुछ से
ज्‍योतिष निकेतन सन्‍देश मात्र एक पत्रिका नहीं है, बल्कि अपने अमूल्‍य ज्ञान के कारण पुस्‍तक सदृश संग्रहणीय भी है।
ज्‍योतिष निकेतन सन्‍देश का सदस्यता शुल्‍क
अवधि-डाक द्वारा-रजिस्‍टर्ड डाक द्वारा
1-वर्ष-250 रु. -500 रु.
2-वर्ष-450 रु. -700 रु.
3-वर्ष-700 रु. -950 रु.
आजीवन-3000 रु.-6000 रु.
(15वर्ष)
कृपया संलग्न फार्म भर कर इसके साथ 250 रुपये एक वर्ष के लिए, 450 रुपये दो वर्ष के लिए, 700 रुपये तीन वर्ष के लिए या 3000 रुपये आजीवन सदस्यता के लिए चेक या डिमांड डॉ. उमेश पुरी, के नाम बनवाकर ज्‍योतिष निकेतन, 1065, सेक्‍टर 2, शास्‍त्री नगर, मेरठ-250005 के पते पर भेजें अथवा उपर्युक्त राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अकाउंट नं. 32227703588 डॉ. उमेश पुरी के नाम में जमा करा सकते हैं। यह पत्रिका साधारण डाक द्वारा भेजी जाती है। पाठकों की मांग पर हमने यह पत्रिका रजिस्टर्ड पोस्ट द्वारा भेजने की भी व्यवस्था की है, जिसकी दरें क्रमशः 500, 700, 950, 6000 रुपये है। किसी अन्य जानकारी के लिए नीचे लिखे फोन नं. पर संपर्क करें।
ज्‍योतिष निकेतन, मेरठ
0121-2765639, 4050465 मोबाईल: 09719103988

पुराने अंक

ज्योतिष निकेतन सन्देश
(गूढ़ विद्याओं का गूढ़ार्थ बताने वाला हिन्दी मासिक)
स्टॉक में रहने तक मासिक पत्रिका के प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, षष्‍ठ एवं सप्‍तम वर्ष के पुराने अंक 1920 पृष्ठ, सजिल्द, गूढ़ ज्ञान से परिपूर्ण और संग्रहणीय हैं। सातों पुस्तकें पत्र लिखकर मंगा सकते हैं। आप रू.1950/-का ड्राफ्‌ट या मनीऑर्डर डॉ.उमेश पुरी के नाम से बनवाकर ज्‍योतिष निकेतन, 1065, सेक्‍टर 2, शास्‍त्री नगर, मेरठ-250005 के पते पर भेजें अथवा उपर्युक्त राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अकाउंट नं. 32227703588 डॉ. उमेश पुरी के नाम में जमा करा सकते हैं। पुस्तकें रजिस्टर्ड पार्सल से भेज दी जाएंगी। किसी अन्य जानकारी के लिए नीचे लिखे फोन नं. पर संपर्क करें।
ज्‍योतिष निकेतन, मेरठ
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ज्योतिष का पत्राचार पाठ्यक्रम

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Friday, March 16, 2012

चाक्षुषोपनिषत स्‍वस्‍थ नेत्रों के लिए रामबाण


...नेत्र नीरोग रहें उसमें रोशनी दीर्घकाल तक सामान्‍य रहे और किसी प्रकार की पीड़ा न हो इसके लिए चाक्षुषी विद्या की चर्चा होती है। चाक्षुषी विद्या चाक्षुषोपनिषत् पर आधारित है...
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