नए रूप रंग के साथ अपने प्रिय ब्‍लॉग पर आप सबका हार्दिक स्‍वागत है !

ताज़ा प्रविष्ठियां

संकल्प एवं स्वागत्

ज्योतिष निकेतन संदेश हिन्‍दी की मासिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित लेख इस ब्लॉग पर जीवन को सार्थक बनाने हेतु आपके लिए समर्पित हैं। आप इसके पाठक हैं, इसके लिए हम आपके आभारी रहेंगे। हमें विश्‍वास है कि आप सब ज्योतिष, हस्तरेखा, अंक ज्योतिष, वास्तु, अध्यात्म सन्देश, योग, तंत्र, राशिफल, स्वास्थ चर्चा, भाषा ज्ञान, पूजा, व्रत-पर्व विवेचन, बोधकथा, मनन सूत्र, वेद गंगाजल, अनुभूत ज्ञान सूत्र, कार्टून और बहुत कुछ सार्थक ज्ञान को पाने के लिए इस ब्‍लॉग पर आते हैं। ज्ञान ही सच्चा मित्र है और कठिन परिस्थितियों में से बाहर निकाल लेने में समर्थ है। अत: निरन्‍तर ब्‍लॉग पर आईए और अपनी टिप्‍पणी दीजिए। आपकी टिप्‍पणी ही हमारे परिश्रम का प्रतिफल है।

बुधवार, मार्च 30, 2011

दृष्टिकोण से ही हम सुखी व दु:खी होते है!


    प्राय: देखने में आता है जो जितना साधन-सम्‍पन्‍न है वह उतना चिंतित और व्‍याकुल है और इसके विपरीत अभाव ग्रस्‍त लोग अधिक मस्‍त व मनमौजी दिखाई पड़ते हैं।
    समान परिस्थिति के दो लोगों में से एक दु:खी और दूसर प्रसन्‍न व सुखी दिख्‍ाने से यह ज्ञात होत है कि दु:ख व सुख का कारण परिस्थितियां नहीं व्‍यक्ति का अपना द़ृष्टिकोण है।
    जो सदैव नकारात्‍मक पक्ष का चिन्‍तन करते हैं या सदैव नकारात्‍मकता को ढूंढने का प्रयास करते हैं या अभ्‍यस्‍त होते हैं वे दु:खी और जो सदैव सकारात्‍म्‍ाकता को ढूंढते हैं और इसके अभ्‍यस्‍त होते हैं वे सदैव सुखी व प्रसन्‍न ही दिखते हैं।
    सुख-दु:ख क्रमश: आते-जाते रहते हैं। इसलिए यदि आपका दृष्टिकोण सुख-दु:ख के प्रति सम हो जाए या सदैव सकारात्‍मक रहे तो सुख-दु:ख आते-जाते रहते हैं और अधिक तंग नहीं करते हैं। मूलत: जिन परिस्थितियों को सुखद् समझते हैं वे हमें सुख देती हैं और जिन परिस्थितियों को हम दु:खद् समझते हैं तो वे हमें दु:ख देती हैं।
    वस्‍तुत: दृष्टिकोण से ही हम सुखी व दु:खी होते हैं। सुविचार एवं सुसंगति से हम मनोबल में उत्तम होते हैं तो हमारा दृष्टिकोण प्रत्‍येक स्थिति के लिए सकारात्‍मक होता है जिस कारण हम सदैव स्‍वयं को सम स्थिति में पाते हैं और स्‍वयं को सुखी व प्रसन्‍न पाते हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्‍पणी देकर अपने विचारों को अभिव्‍यक्‍त करें।

पत्राचार पाठ्यक्रम

ज्योतिष का पत्राचार पाठ्यक्रम

भारतीय ज्योतिष के एक वर्षीय पत्राचार पाठ्यक्रम में प्रवेश लेकर ज्योतिष सीखिए। आवेदन-पत्र एवं विस्तृत विवरणिका के लिए रु.50/- का मनीऑर्डर अपने पूर्ण नाम व पते के साथ भेजकर मंगा सकते हैं। सम्पर्कः डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर' ज्योतिष निकेतन 1065/2, शास्त्री नगर, मेरठ-250 005
मोबाईल-09719103988, 01212765639, 01214050465 E-mail-jyotishniketan@gmail.com

पुराने अंक

ज्योतिष निकेतन सन्देश
(गूढ़ विद्याओं का गूढ़ार्थ बताने वाला हिन्दी मासिक)
स्टॉक में रहने तक मासिक पत्रिका के प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, षष्‍ठ एवं सप्‍तम वर्ष के पुराने अंक 1920 पृष्ठ, सजिल्द, गूढ़ ज्ञान से परिपूर्ण और संग्रहणीय हैं। सातों पुस्तकें पत्र लिखकर मंगा सकते हैं। आप रू.1950/-का ड्राफ्‌ट या मनीऑर्डर डॉ.उमेश पुरी के नाम से बनवाकर ज्‍योतिष निकेतन, 1065, सेक्‍टर 2, शास्‍त्री नगर, मेरठ-250005 के पते पर भेजें अथवा उपर्युक्त राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अकाउंट नं. 32227703588 डॉ. उमेश पुरी के नाम में जमा करा सकते हैं। पुस्तकें रजिस्टर्ड पार्सल से भेज दी जाएंगी। किसी अन्य जानकारी के लिए नीचे लिखे फोन नं. पर संपर्क करें।
ज्‍योतिष निकेतन, मेरठ
0121-2765639, 4050465 मोबाईल: 09719103988

विज्ञापन