नए रूप रंग के साथ अपने प्रिय ब्‍लॉग पर आप सबका हार्दिक स्‍वागत है !

ताज़ा प्रविष्ठियां

संकल्प एवं स्वागत्

ज्योतिष निकेतन संदेश हिन्‍दी की मासिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित लेख इस ब्लॉग पर जीवन को सार्थक बनाने हेतु आपके लिए समर्पित हैं। आप इसके पाठक हैं, इसके लिए हम आपके आभारी रहेंगे। हमें विश्‍वास है कि आप सब ज्योतिष, हस्तरेखा, अंक ज्योतिष, वास्तु, अध्यात्म सन्देश, योग, तंत्र, राशिफल, स्वास्थ चर्चा, भाषा ज्ञान, पूजा, व्रत-पर्व विवेचन, बोधकथा, मनन सूत्र, वेद गंगाजल, अनुभूत ज्ञान सूत्र, कार्टून और बहुत कुछ सार्थक ज्ञान को पाने के लिए इस ब्‍लॉग पर आते हैं। ज्ञान ही सच्चा मित्र है और कठिन परिस्थितियों में से बाहर निकाल लेने में समर्थ है। अत: निरन्‍तर ब्‍लॉग पर आईए और अपनी टिप्‍पणी दीजिए। आपकी टिप्‍पणी ही हमारे परिश्रम का प्रतिफल है।

मंगलवार, मार्च 29, 2011

सुख चाहने पर मिलता है!


  
    सुख-दुःख एक सिक्के के दो पहलू हैं, सुख के बाद दुःख और दुःख के बाद सुख आता ही रहता है। संसार में कोई ऐसा व्यक्ति ढूंढने से भी नहीं मिलेगा जिसने दुःख का सामना न किया हो। संसार में कोई भी एक ऐसा नहीं होगा जो दुःखी न हो। नानक जी ने कहा भी था कि नानक दुखिया सब संसार।
    सुख होते हुए भी कभी न कभी एकरसता से ऊब उत्पन्न हो जाती है और यह ऊब दुःख का कारण बन जाती है। यह मन की प्रवृत्ति है कि उसे कोई भी एक स्थिति निरन्तर पसन्द नहीं है!
    यदि आप अभी सुखी हैं तो एक दिन आपको दुःख की अनुभूति किसी न किसी कारण वश करनी ही होगी और यदि आप दुःखी हैं तो किसी भी कारण वह एक दिन सुख की अनुभूति से दो चार होना ही पड़ेगा।
    वस्तुतः सुख-दुःख है क्या? जीवन में आने वाली विभिन्न परिस्थितियों का परिवर्तन मात्र ही सुख-दुःख के नाम से जाना जाता है। लेकिन यह भी सत्य नहीं है! सत्य तो यह है कि सुख-दुःख का कारण मनःस्थिति है जो किसी भी परिस्थिति में सुख या दुःख का कारण बन जाती है। मूलतः सुख और दुःख मन के कारण उत्पन्न होते हैं। स्पष्ट है कि सुख-दुःख मनोजन्य ही होते हैं।
    सुख-दुःख के लिए परिस्थितियों को दोषी मानना अज्ञानता है। सुखः-दुःख का मूल कारण अन्तःकरण में निहित है, सुख की चाह पूर्ण करने के लिए मन पर ध्यान देना होगा। मन प्रसन्न है तो चहुं ओर प्रसन्नता ही दृष्टिगोचर होगी।
    प्रसन्न मन हर परिस्थिति का सामना हंसकर ही करता है। उसे परिश्रम में आनन्द, संघर्ष में सुख और असफलता में सफलता का सूत्र मिलता है जिस कारण अन्ततः वह सफलता का स्वागत्‌ करता है।
    जो संघर्षों एवं परेशानियों से भयभीत होता है वह कभी भी उत्साहित नहीं होता है और फलतः वह असफल होकर दुःखी ही होता है। अनुकूलता में हर्ष और प्रतिकूलता में दुःखी होना मन की निर्बलता है। निर्बल मन से युक्त व्यक्ति मृतक सदृश जीवन जीता है। सुख की चाह रखें पर परेशानियों से लड़ने का उत्साह भी रखेंगे तो परेशानियां सुख-सफलता ही लेकर आएंगी नाकि  दुःख-असफलता। जो परेशानियों को अवरोध समझकर ठिठक जाते हैं अर्थात्‌ रुक जाते हैं वे ही दुःखी होते हैं और जो ठिठके बिना परेशानियों को परास्त कर आगे निकल जाते हैं वो ही सुख के भागी होते हैं।
    आशा और उत्साह मन के बल हैं, जिसके पास हैं वे प्रत्येक परिस्थिति में जो चाहते हैं वे पाते हैं! आशा और उत्साह अन्तः में हैं उन्हें पुकारकर जगाएंगे तो मन बली हो जाएगा और तब परेशानियां आपका कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएंगी।
    सुख की चाह रखें पर दुःख से भयभीत न हों! आशा और उत्साह को जगाएंगे तो सुख  आपके द्वार पर खड़ा होकर अन्दर आने को तत्पर दिखेगा।
   


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्‍पणी देकर अपने विचारों को अभिव्‍यक्‍त करें।

पत्राचार पाठ्यक्रम

ज्योतिष का पत्राचार पाठ्यक्रम

भारतीय ज्योतिष के एक वर्षीय पत्राचार पाठ्यक्रम में प्रवेश लेकर ज्योतिष सीखिए। आवेदन-पत्र एवं विस्तृत विवरणिका के लिए रु.50/- का मनीऑर्डर अपने पूर्ण नाम व पते के साथ भेजकर मंगा सकते हैं। सम्पर्कः डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर' ज्योतिष निकेतन 1065/2, शास्त्री नगर, मेरठ-250 005
मोबाईल-09719103988, 01212765639, 01214050465 E-mail-jyotishniketan@gmail.com

पुराने अंक

ज्योतिष निकेतन सन्देश
(गूढ़ विद्याओं का गूढ़ार्थ बताने वाला हिन्दी मासिक)
स्टॉक में रहने तक मासिक पत्रिका के प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, षष्‍ठ एवं सप्‍तम वर्ष के पुराने अंक 1920 पृष्ठ, सजिल्द, गूढ़ ज्ञान से परिपूर्ण और संग्रहणीय हैं। सातों पुस्तकें पत्र लिखकर मंगा सकते हैं। आप रू.1950/-का ड्राफ्‌ट या मनीऑर्डर डॉ.उमेश पुरी के नाम से बनवाकर ज्‍योतिष निकेतन, 1065, सेक्‍टर 2, शास्‍त्री नगर, मेरठ-250005 के पते पर भेजें अथवा उपर्युक्त राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अकाउंट नं. 32227703588 डॉ. उमेश पुरी के नाम में जमा करा सकते हैं। पुस्तकें रजिस्टर्ड पार्सल से भेज दी जाएंगी। किसी अन्य जानकारी के लिए नीचे लिखे फोन नं. पर संपर्क करें।
ज्‍योतिष निकेतन, मेरठ
0121-2765639, 4050465 मोबाईल: 09719103988

विज्ञापन