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बुधवार, मार्च 16, 2011

35-समृद्ध कैसे बनें?


   
    आपको 34 पोस्‍ट में प्रकृति का स्‍वाध्‍याय कराया गया है। प्रकृति के स्‍वाध्‍याय से आपका परिचय जगत् के सवार्धिक धनी से हो जाएगा। धनी की संगति में समृद्ध होने का रहस्‍य ज्ञात होगा और साथ-साथ उन्‍नति के अवसर भी हाथ लगेंगे। सूत्रों को भली-भांति पढ़कर समझना चाहिए और उन्‍हें प्रतिदिन व्‍यवहार में लाना चाहिए। इन सूत्रों को व्‍यवहार में लाने पर आपमें एक नया आत्‍मविश्‍वास जाग्रत हो जाएगा, यह आपको बहुत कुछ नया करने के लिए प्रेशर करेगा। तब आप अपने आप में परिवर्तन पाएंगे जो आपको समृद्धि के मार्ग पर अग्रसर करेगा। यदि आपने इन सूत्रों को समझकर व्‍यवहार में लाने के लिए निरन्‍तर अभ्‍यास किया तो आपको समृद्धि के पीछे-पीछे नहीं भटकना होगा, अपितु समृद्धि आपके पीछे-पीछे भागेगी। सर्वप्रथम समृद्धि के सरल सूत्रों को जानिए फिर बार-बार उनकी पुनरावृत्ति करके स्‍मरण कीजिए। इसके बाद इसका अभ्‍यास कीजिए जिससे इनको आत्‍मसातत कर सकें या पूर्णत: व्‍यवहार में समाहित कर सकें। यदि यह सब करने में आप तत्‍पर हुए तो आप समृद्धि को पा जाएंगे। इस आशा के साथ आपसे स्‍थूलत: विदा लेते हैं कि आप समृद्ध, सम्‍पन्‍न और वैभवशाली बनने को तत्‍पर अवश्‍य होंगे।  
(इस सीरीज में 'समृद्ध कैसे बनें' पुस्‍तक के अंश आपके लिए प्रस्‍तुत किए हैं। पूरी पुस्‍तक शीघ्र ई-बुक के रूप में उपलब्‍ध होगी जिसमें समृद्धि बढ़ाने के अनेक सूत्रों से परिचय कराया गया है जिनके अनुपालन से जीवन की काया पलट सकती है। प्रतीक्षा करें, पुस्‍तक शीघ्र उपलब्‍ध होगी।)
 

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