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मंगलवार, फ़रवरी 08, 2011

क्या आपके पास भी है प्रतिदिन शून्य हो जाने वाला खाता?



क्या आपके पास भी है प्रतिदिन शून्य हो जाने वाला खाता? इस खाते में प्रतिदिन एक निश्चित राशि 1440 जमा हो जाती है और आखिरी मिनट में यह राशि शून्य हो जाती है। अगले दिन फिर इस खाते में निश्चित राशि 1440 जमा हो जाती है और पूर्व दिन की तरह आखिरी मिनट में शून्य हो जाती है। अब चाहे इसमें से कुछ खर्च करें या नहीं यह तो शून्य हो ही जाएगी। यह ऐसी राशि है कि जितनी अधिक से अधिक खर्च करो उतना लाभदायी है। अधिकांश राशि ही प्रयोग में लानी चाहिए क्योंकि पूर्व दिन की राशि अगले दिन खर्च कर ही नहीं सकते हैं। चलो बता देते हैं कि यह कौन सा खाता है, यह खाता है 'समय' का। इस खाते में प्रतिदिन 1440 मिनट जमा होते हैं और आखिरी मिनट में शून्य हो जाते हैं और अगले दिन स्वतः 1440 मिनट जमा हो जाते हैं। आप इसमें से जितने भी मिनट प्रयोग लाएं, परन्तु शेष मिनट अन्त में शून्य ही हो जाएंगे। समय दौड़ रहा है और इसे पकड़ने के लिए इसके साथ-साथ आपको दौड़ना होगा। तभी आप इसका भरपूर सदुपयोग कर सकेंगे।
आपको प्रत्येक मिनट स्वयं से यह प्रश्न पूछना होगा-मैं इस मिनट का क्या सदुपयोग कर सकता हूँ? यदि आपने इसका उत्तर दिया तो आपकी सफलता में यह उत्तर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जब आप यह लेखाजोखा करने लगेंगे-आज मैंने कितना समय गंवाया है? समय गंवाना आत्महत्या करने सदृश है क्योंकि समय अनमोल है। इसको यूं न गंवाएं। प्रायः हम सर्वाधिक समय गवांते ही हैं। जो सर्वाधिक समय का सदुपयोग करता है वो ही सफलतम व्यक्तियों की सूची में स्थान पाता है।
घड़ी की सुईयां निरन्तर गतिमान हैं, मिनटों की चिन्ता करें घंटो की अपने आप होने लगेगी। समय किसी के लिए नहीं रुकता है और न बीता समय वापिस आता है। समय बीतने से पूर्व उसका मोल जानें। समय व्यर्थ तो जीवन व्यर्थ। कितना भी दाम लगाएं बीता समय वापिस नहीं मिल सकता। समय तो बीत ही जाएगा, यहां देखने वाली बात यह है कि आप समय का उपयोग किस प्रकार करते हैं। सफल लोगों को समय के मूल्य का आभास होता है।
समय का प्रबन्धन सिखाने वाली अनेक पुस्तकें बाजार में उपलब्ध हैं और उनका मूल्य भी बहुत है। इन्हें पाने के लिए धन और पढ़ने के लिए समय खर्च करना पड़ेगा। बिना कुछ दिए इन पुस्तकों का सार चुटकियों में समझाते हैं-प्रतिदिन रात्रि में अगले दिन किए जाने वाले कार्यों की सूची बनाईए और सूची को सबसे महत्वपूर्ण कार्य को पहले करने के क्रम में लगाईए। अगले दिन कुछ भी सोचे बिना सूची के अनुसार कार्य करना प्रारम्भ कर दें और निरन्तर करते रहें। ऐसा आप एक सप्ताह तक करके देखें। यदि आपने ऐसा किया तो आप स्वतः ऐसा सदैव करने लगेंगे क्योंकि आप समय का प्रबन्धन करना सीख चुके होंगे और समय के खाते के प्रतिदिन के बकाए को शून्य होने से पूर्व ही अधिकांशतः प्रयोग में लाने लगेंगे।

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