नए रूप रंग के साथ अपने प्रिय ब्‍लॉग पर आप सबका हार्दिक स्‍वागत है !

ताज़ा प्रविष्ठियां

संकल्प एवं स्वागत्

ज्योतिष निकेतन संदेश हिन्‍दी की मासिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित लेख इस ब्लॉग पर जीवन को सार्थक बनाने हेतु आपके लिए समर्पित हैं। आप इसके पाठक हैं, इसके लिए हम आपके आभारी रहेंगे। हमें विश्‍वास है कि आप सब ज्योतिष, हस्तरेखा, अंक ज्योतिष, वास्तु, अध्यात्म सन्देश, योग, तंत्र, राशिफल, स्वास्थ चर्चा, भाषा ज्ञान, पूजा, व्रत-पर्व विवेचन, बोधकथा, मनन सूत्र, वेद गंगाजल, अनुभूत ज्ञान सूत्र, कार्टून और बहुत कुछ सार्थक ज्ञान को पाने के लिए इस ब्‍लॉग पर आते हैं। ज्ञान ही सच्चा मित्र है और कठिन परिस्थितियों में से बाहर निकाल लेने में समर्थ है। अत: निरन्‍तर ब्‍लॉग पर आईए और अपनी टिप्‍पणी दीजिए। आपकी टिप्‍पणी ही हमारे परिश्रम का प्रतिफल है।

बुधवार, फ़रवरी 23, 2011

14-समृद्ध कैसे बनें?


 
    प्रकृति शोध की प्रेरणा देती है!
    प्रकृति हमारे सम्‍मुख दो रूपों में दृष्टिगोचर होती है-व्‍यक्‍त एवं अव्‍यक्‍त। व्‍यक्‍त रूप प्रकृति का शोध के उपरान्‍त ज्ञात रूप है जिसको हम शोधार्थियों(वैज्ञानिकों) के अकल्‍पनीय प्रयासों से जान चुके हैं और शोध तो निरन्‍तर हो रहे हैं जोकि सदैव होते रहेंगे। प्रकृति का जो अव्‍यक्‍त रूप है उसे जानना शेष है। यही शेष हमें शोध का निमन्‍त्रण देता है। जो इस आवाह्न को स्‍वीकार लेता है, वह कुछ व्‍यक्‍त करने के लिए शोधार्थी बन जाता है।
    शोधार्थी आप भी बन सकते हैं, विचार करके देखें। जगत् को समृद्ध करने में इन शोधार्थियों का महत्‍वपूर्ण योगदान है क्‍योंकि वे समृद्धि के ज्ञात साधन जुटाते हैं। प्रकृति रूपी पुस्‍तक को पढ़ने वाला जितना उसे व्‍यवहार-रूप में पढ़ता जाता है उतना समृद्ध होता जाता है। वस्‍तुत: समृद्ध होने के लिए प्रकृति के व्‍यक्‍त और अव्‍यक्‍त रूपों को जानना मात्र है।
     व्‍यक्‍त को जान लेने मात्र से ही व्‍यक्ति समृद्ध होने लगता है। अव्‍यक्‍त को जानने के प्रयास मात्र से तो समृद्धि का झरना अविरल रूप में बहने लगता है।
    अत: अपने साधनों के अनुरूप प्रकृति से प्रेरणा लेकर शोध के प्रयास में संलग्‍न रहने का प्रयास करना चाहिए। यदि ऐसा किया तो समझ लें कि आपने अपने समृद्ध होने का मार्ग निश्चित कर लिया है।
    शोध से आपको निए विचार और नया ज्ञान मिलता है जोकि समाज-कल्‍याण, यश, धन एवं सुख का कारक बन जाता है। (क्रमश:)
(आप समृद्धि के रहस्‍य से वंचित न रह जाएं इसलिए ज्‍योतिष निकेतन सन्‍देश पर प्रतिदिन आकर 'समृद्ध कैसे बनें' सीरीज के लेख पढ़ना न भूलें! ये लेख आपको सफलता का सूत्र दे सकते हैं, इस सूत्र के अनुपालन से आप समृद्ध बनने का सुपथ पा सकते हैं!)

1 टिप्पणी:

  1. शोध की चर्चा की है आपने...मेरा यह मत है कि ज्योतिष के संदर्भ में शोध की महती आवश्यकता है। आजकल ज्योतिष को समाज में बहुत ही हेय दृष्टि से देखा जाता है। ज्योतिष, तंत्र-मन्त्र-यंत्र, कर्मकांड अथवा भारतीय दर्शन से सम्बंधित शास्त्रों की बात करते ही लोग हमें दकियानूसी विचारधारा वाला मानने लगते हैं। पाश्चात्य सभ्यता की अनुचित बातों का तो अंधानुकरण करते हैं परन्तु वहाँ के अनुशासन को अपने जीवन में उतारने से बचते हैं। आज जहां दूसरे राष्ट्र अपनी सभ्यता संस्कृति से सम्बंधित विचारों पर शोध कर रहे हैं वही भारतभूमि के नौनिहाल यहाँ की संस्कृति को पौराणिक, असामयिक और अप्रासंगिक मानते हैं।

    गोपाल

    उत्तर देंहटाएं

टिप्‍पणी देकर अपने विचारों को अभिव्‍यक्‍त करें।

पत्राचार पाठ्यक्रम

ज्योतिष का पत्राचार पाठ्यक्रम

भारतीय ज्योतिष के एक वर्षीय पत्राचार पाठ्यक्रम में प्रवेश लेकर ज्योतिष सीखिए। आवेदन-पत्र एवं विस्तृत विवरणिका के लिए रु.50/- का मनीऑर्डर अपने पूर्ण नाम व पते के साथ भेजकर मंगा सकते हैं। सम्पर्कः डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर' ज्योतिष निकेतन 1065/2, शास्त्री नगर, मेरठ-250 005
मोबाईल-09719103988, 01212765639, 01214050465 E-mail-jyotishniketan@gmail.com

पुराने अंक

ज्योतिष निकेतन सन्देश
(गूढ़ विद्याओं का गूढ़ार्थ बताने वाला हिन्दी मासिक)
स्टॉक में रहने तक मासिक पत्रिका के प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, षष्‍ठ एवं सप्‍तम वर्ष के पुराने अंक 1920 पृष्ठ, सजिल्द, गूढ़ ज्ञान से परिपूर्ण और संग्रहणीय हैं। सातों पुस्तकें पत्र लिखकर मंगा सकते हैं। आप रू.1950/-का ड्राफ्‌ट या मनीऑर्डर डॉ.उमेश पुरी के नाम से बनवाकर ज्‍योतिष निकेतन, 1065, सेक्‍टर 2, शास्‍त्री नगर, मेरठ-250005 के पते पर भेजें अथवा उपर्युक्त राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अकाउंट नं. 32227703588 डॉ. उमेश पुरी के नाम में जमा करा सकते हैं। पुस्तकें रजिस्टर्ड पार्सल से भेज दी जाएंगी। किसी अन्य जानकारी के लिए नीचे लिखे फोन नं. पर संपर्क करें।
ज्‍योतिष निकेतन, मेरठ
0121-2765639, 4050465 मोबाईल: 09719103988

विज्ञापन