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गुरुवार, मई 13, 2010

आचरण


तदिन्द्रो अर्थं चेतति, यूथेन वृष्णिरेजति।-सामवेद 1345
वह परमात्मा मनुष्य के भावों को देखता है व सुखसमूह के संग आता है।
कहते हैं कि जैसा भाव हो वैसा ही होता है। आप सुआचरण करेंगे तो आपको पलट में सुआचरण ही मिलेगा। जब जैसा जिससे चाहते हैं वैसा ही हो इसके लिए आपको भी उससे वेसा ही व्यवहार करना चाहिए। व्यवहार में निज भाव परिलक्षित होते हैं। सुभाव हो तो व्यवहार भी अच्छा ही होता है।
जब जिससे जो चाहा, वैसा ही किया। सुसाथ सुफल प्रतिफल में लिया॥

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