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मंगलवार, जुलाई 05, 2011

लक्ष्‍य सिद्धि के लिए स्‍पष्‍ट योजना चाहिए!


    आपको लक्ष्‍य ज्ञात होना चाहिए और उसको पाने के लिए स्‍पष्‍ट दृष्टिकोण अपनाना होगा। आप सभी में कुछ न कुछ करने की सामर्थ्‍य है, उसके द्वारा आप अपने स्‍वप्‍न को साकार कर सकते हैं। लक्ष्‍य को पाने के लिए अच्‍छा स्‍वास्‍थ्‍य, एकाग्रता, आत्‍मविश्‍वास, निरन्‍तर सक्रियता के साथ-साथ स्‍पष्‍ट दृष्टिकोण होना चाहिए। दूजे आपसे क्‍या अपेक्षा रखते हैं, यह कतई महत्‍वपूर्ण नहीं है।
    आपको लक्ष्‍य निर्धारित करके उस तक पहुंचने की स्‍पष्‍ट योजना आपको बनाकर सतत् परिश्रम एवं लगन सहित कार्य करना है।
    लक्ष्‍य जो भी बनाएं, व्‍यवहारिक बनाएं, काल्‍पनिक लक्ष्‍य कभी न बनाएं। यदि आप अपनी योजना के अनुरूप कार्य नहीं कर पा रहे हैं तो सबसे पहले यह अवश्‍य ज्ञात करें कि उसका क्‍या कारण है।
    काम अधिक हो तो उससे जी न चुराएं, काम न करने के बहाने न खोजें, टाल-मटोल न करें। लक्ष्‍य पाना है तो समर्पण भावना से कार्य करना है।  समस्याओं का समाधान कठिन जानकर भागें नहीं। वास्तविकता को स्‍वीकार करके उसका समाधान खोजें और यदि नहीं मिल रहा है तो किसी विशेषज्ञ से सलाह लेकर समाधान निकालें। वैसे समस्‍या समाधान की सहज रीति यह है कि समस्‍याओं को कई भागों में बांटकर क्रमश: उनका हल खोजें। यदि फिर भी न हल हो पाए तो विशेषज्ञ से सलाह लेने में न हिचकें।
    कार्य की समाप्ति के उपरान्‍त उसका मूल्यांकन करना न भूलें। लक्ष्‍य को पाने की समय सीमा तय करें और उसका कठोरता से पालन करें। योजना के सभी चरणों को प्रारम्‍भ एवं पूर्ण करने की अवधि भी तय करें। साथ ही उसका मूल्यांकन भी करते रहें।
    यदि किसी ग्रुप प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है, तो सभी लोगों के बीच विचार-विमर्श होना जरूरी है। कौन कितने समय में क्या करेगा, इसका भी निर्धारण करें। कार्य विभाजन को लिखकर रखें, जिससे सभी को अपने उत्तरदायित्वों को समझने में आसानी हो सके। कार्यों के विकास का मूल्यांकन भी करते रहें।
    यदि दैनिक कार्य मुख्य लक्ष्य से टकराते हैं, तो दोनों कार्यो को अलग-अलग कर लें। टीम या स्वयं के लिए धन और समय का किस तरह से निवेश किया जा सकता है, इसके बारे में पूर्ण जानकारी अवश्य रखें।
    सफलता के लिए समय का प्रबन्‍धन आवश्‍यक है और यह योजनाबद्ध होकर ही कर सकते हैं।
    स्वस्थ शरीर और बुद्धि के माध्यम से ही अधिक उत्‍पादकता एवं अच्‍छी वस्‍तुओं को पा सकते हैं। किसी भी कार्य को बेहतर और संगठित तरीके से करने का सबसे सरल रीति यह है कि कौन, क्या, कब, कहां और क्यों को अपने जीवन में उतारें।
    यदि किसी दबाव में हां करते हैं तो तो शालीनता से ना कहने की आदत डालें। आप गलत सोचते हैं कि सबको खुश रखकर आप अधिक सफल और लोकप्रिय हो जाएंगे। यह नीति गलत है और इससे आप अपने परिवार व स्वयं को हानि ही पहुंचाएंगे।
    जीवन को अच्‍छा व्‍यतीत करने के लिए सबको समय का सदुपयोग करने का अधिकार है।
    किसी काम के लिए दबाव डाले, उस समय अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लें।
    जब आप एक बार ना कहने की आदत डाल लेते हैं, तब इसे कहने में किसी तरह कठिनाई नहीं आती।
    समय एवं भावनात्‍मक शक्ति का दुरुपयोग कदापि न करें।
    न कहने से आपकी महत्ता कम नहीं होती है और मित्र न बनें ऐसा भी नहीं है।
    लक्ष्‍य सिद्धि के लिए उस तक पहुंचने तक का स्‍पष्‍ट चित्र अर्थात् योजना आपके पास होनी चाहिए। शेष तो फिर समर्पण भाव से सक्रियता होनी चाहिए।

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