नए रूप रंग के साथ अपने प्रिय ब्‍लॉग पर आप सबका हार्दिक स्‍वागत है !

ताज़ा प्रविष्ठियां

संकल्प एवं स्वागत्

ज्योतिष निकेतन संदेश हिन्‍दी की मासिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित लेख इस ब्लॉग पर जीवन को सार्थक बनाने हेतु आपके लिए समर्पित हैं। आप इसके पाठक हैं, इसके लिए हम आपके आभारी रहेंगे। हमें विश्‍वास है कि आप सब ज्योतिष, हस्तरेखा, अंक ज्योतिष, वास्तु, अध्यात्म सन्देश, योग, तंत्र, राशिफल, स्वास्थ चर्चा, भाषा ज्ञान, पूजा, व्रत-पर्व विवेचन, बोधकथा, मनन सूत्र, वेद गंगाजल, अनुभूत ज्ञान सूत्र, कार्टून और बहुत कुछ सार्थक ज्ञान को पाने के लिए इस ब्‍लॉग पर आते हैं। ज्ञान ही सच्चा मित्र है और कठिन परिस्थितियों में से बाहर निकाल लेने में समर्थ है। अत: निरन्‍तर ब्‍लॉग पर आईए और अपनी टिप्‍पणी दीजिए। आपकी टिप्‍पणी ही हमारे परिश्रम का प्रतिफल है।

मंगलवार, जून 28, 2011

सफलता के लिए आपके प्रयास ही आपके स्‍वप्‍नों को उड़ान देते हैं!



    यदि आप सफलता पाना चाहते हैं तो सर्वप्रथम आपको यह निश्चित करना होगा कि आप क्‍या चाहते हैं। आप लक्ष्‍य जो भी बनाएं आपको बनाना ही होगा। लक्ष्‍य को पाने हेतु विभिन्‍न परेशानियों का सामना करना ही पड़ता है। समस्‍याएं कितनी भी आएं सभी समस्‍याओं का हल एक साथ नहीं करना चाहिए। एक समय में एक ही समस्या का हल खोजना समस्याओं का समाधान खोजने का उपयुक्‍त तरीका है। यह कोई नहीं पूछता कि लक्ष्‍य पाने के लिए आपने कितनी प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना किया। परेशानियों एवं कठिनाईयों से निकलने का मार्ग उन्‍हीं में छिपा होता है। असफलता की कोख से ही सफलता के सूत्र उत्‍पन्‍न होते हैं। आप प्रतिकूल परिस्थितियों को भी अपने प्रयास तथा कार्यों द्वारा लक्ष्य के अनुकूल बना सकते हैं। यदि आप कार्य का प्रारम्‍भ सकारात्मक सोच से करते हैं, तो सफलता अवश्‍य मिलेगी यह जान लें।
    यदि आप किसी परेशानी या समस्‍या से लगातार जूझते हैं, तो अपने प्रयासों से ही उन पर आसानी से विजय पा सकते हैं। यह कतई आवश्‍यक नहीं है कि आप अपने लक्ष्य को पाने के लिए कैसे प्रयास कर रहे हैं। लेकिन आपके प्रयासों से आपको लगेगा कि आप अपने लक्ष्य के अत्‍यन्‍त समीप होते जा रहे हैं।
    यदि आप समस्‍या ग्रस्‍त होते हैं तो सर्वप्रथम स्‍वयं से प्रश्‍न करें कि ऐसा क्‍या हुआ जो यह समस्‍या आयी। इस समस्‍या के आने के पार्श्‍व में क्या कारण हो सकते हैं? इस समस्‍या से हम किस प्रकार मुक्‍त हो सकते हैं। इसके समाधान के लिए मैं क्‍या कर सकता हूं और दूसरे की कितनी सहायता ली जा सकती है। कहने का तात्‍पर्य यह है कि इस समस्या से निकलने के लिए कौन-कौन से विकल्प उपलब्‍ध हैं। दूजे इस तरह कि समस्याओं से ग्रस्‍त होते हैं, तो इसके समाधान हेतु कौन-कौन से साधन अपनाते हैं। यदि ध्यान से सभी बातों पर विचार करेंगे तो समस्‍या से मुक्ति एवं सफलता पाना सहज हो जाएगा और आप पहले से अच्‍छी स्थिति में होंगे। यह जान लें कि समस्‍या के समाधान का विश्‍लेषण और सही सूचनाओं का निर्वाध गति से संचार अनेक विकल्पों को उपलब्ध कराकर सफलता का मार्ग प्रशस्‍त करता है।
    हम परेशान या कठिनाई में तब आते हैं जब स्‍वयं को अक्षम समझते हैं। ऐसी स्थिति में हम भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर पाते हैं। जब तक भावनाओं को नियंत्रित नहीं करेंगे तब तक हम समस्‍याओं से मुक्ति का स्‍पष्‍ट दृष्टिकोण नहीं बना पाएंगे। भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए रुचिकर कार्य करें या संगीत का आनंद ले सकते हैं। विपरीत परिस्थितियां ही जीवन में बड़े कार्यों को करने की ऊर्जा प्रदान करती है। इस प्रकार आप जीवन में आने वाली बाधाओं को विजय की ओर मोड़ सकते हैं।
    सत्‍य सूत्र तो यह है कि आप आने वाली समस्‍याओं का समाधान खोजकर जो कुछ भी प्राप्त करते हैं, तो यह प्रयास आपको बड़ी वस्‍तुओं को पाने या बड़े सपनों को पूरा करने के लिए सक्षम बनाते हैं। अत: सफलता के लिए आपके प्रयास ही आपके स्‍वप्‍नों को उड़ान देते हैं!


   

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्‍पणी देकर अपने विचारों को अभिव्‍यक्‍त करें।

पत्राचार पाठ्यक्रम

ज्योतिष का पत्राचार पाठ्यक्रम

भारतीय ज्योतिष के एक वर्षीय पत्राचार पाठ्यक्रम में प्रवेश लेकर ज्योतिष सीखिए। आवेदन-पत्र एवं विस्तृत विवरणिका के लिए रु.50/- का मनीऑर्डर अपने पूर्ण नाम व पते के साथ भेजकर मंगा सकते हैं। सम्पर्कः डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर' ज्योतिष निकेतन 1065/2, शास्त्री नगर, मेरठ-250 005
मोबाईल-09719103988, 01212765639, 01214050465 E-mail-jyotishniketan@gmail.com

पुराने अंक

ज्योतिष निकेतन सन्देश
(गूढ़ विद्याओं का गूढ़ार्थ बताने वाला हिन्दी मासिक)
स्टॉक में रहने तक मासिक पत्रिका के प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, षष्‍ठ एवं सप्‍तम वर्ष के पुराने अंक 1920 पृष्ठ, सजिल्द, गूढ़ ज्ञान से परिपूर्ण और संग्रहणीय हैं। सातों पुस्तकें पत्र लिखकर मंगा सकते हैं। आप रू.1950/-का ड्राफ्‌ट या मनीऑर्डर डॉ.उमेश पुरी के नाम से बनवाकर ज्‍योतिष निकेतन, 1065, सेक्‍टर 2, शास्‍त्री नगर, मेरठ-250005 के पते पर भेजें अथवा उपर्युक्त राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अकाउंट नं. 32227703588 डॉ. उमेश पुरी के नाम में जमा करा सकते हैं। पुस्तकें रजिस्टर्ड पार्सल से भेज दी जाएंगी। किसी अन्य जानकारी के लिए नीचे लिखे फोन नं. पर संपर्क करें।
ज्‍योतिष निकेतन, मेरठ
0121-2765639, 4050465 मोबाईल: 09719103988

विज्ञापन