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सोमवार, मई 09, 2011

स्‍थायी सफलता सद्भावना से मिलती है!



       
    बहुत लोग इसलिए नहीं सफल हो पाते क्‍योंकि उनके मार्ग में ईर्ष्‍या आड़े आ जाती है। यह जान लीजिए कि जब तक आप किसी मित्र या सहयोगी की उन्‍नति पर निश्‍छलता से बधाई या उसकी प्रशंसा नहीं करते तब तक आप सफलता की सीढि़यां नहीं चढ़ पाएंगे। प्राय: ऐसा ही होता है कि जब मित्र या सहयोगी विपत्ति में होता है तो आप उसकी सहायता के लिए पहुंच जाते हैं परन्‍तु जब वह उन्‍नति पाता है तो उसे बधाई देने में अत्‍यन्‍त सजगता बरतते हैं। ईर्ष्‍या से ही असहयोग उत्‍पन्‍न होता है। दूजे की सफलता पर निश्‍छलता एवं खुले दिल से बधाई दें एवं उसकी प्रशंसा करें।
    संशय को पास न फटकने दें। यह सोच गलत है कि दूजे आपका बेवजह लाभ उठाएंगे। इस भ्रम या संशय को मस्तिष्क से निकाल दें। यह सोच ही आपको दूजों से दूर करती है और आप समाजिक नहीं बन पाते हैं। खुलकर सबके बीच में शामिल होईए। सामाजिक बनिए और किसी भी संशय को पास न फटकने दीजिए। ऐसा होने पर आप सफलता को अपने निकट करते जाएंगे। आप किसी के प्रति दयालु, उदार या सहानुभूति रखेंगे तो लोग आपका लाभ उठाएंगे या दूजे आपकी हंसी उड़ाएंगे, ऐसा कदापि नहीं है। संशय से दूरी और सामजिकता सफलता को आपके द्वार पर ला देती है।
    अधिकांश लोग स्‍वयं को हीन समझते हैं या शंकित रहते हैं। यदि आप भी इनमें से एक हैं तो अन्‍दर और दोनों प्रकार से विकास कीजिए। आप ऐसी पुस्‍तकों का अध्‍ययन कीजिए जिनसे आपका दोनों प्रकार से विकास हो। आपका हृदय विकसित हो और वाणी सन्‍तुलित हो एवं मन में शान्ति आए व आत्‍म सन्‍तुलन होने से आत्‍मविकास भी हो। ढोंग अधिक दिन तक नहीं चलता है, इसलिए इसे कदापि मत कीजिए। यह सत्‍य है कि स्‍थायी सफलता सद्भावना से मिलती है। 
     

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