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गुरुवार, मई 05, 2011

व्‍यक्तित्‍व को निखारे लें!

                   


        व्‍यक्तित्‍व भी सफलता दिलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। व्‍यक्तित्‍व को निखार लेना चाहिए। लेकिन कैसे? यह तब तक आप नहीं जान पाएंगे जब तक आप अपने त्रियामी व्‍यक्तित्‍व को नहीं जान लेते।
    आप स्‍वयं को एक समझते हैं, पर हैं आप तीन? चौंक गए न! चौंकिए मत।
    आप त्रिआयामी है।
    एक आयाम है-जैसा आप स्‍वयं को समझते हैं!
    दूसरा आयाम है-जैसा लोग आपको समझते हैं!
    तीसरा आयाम है-जैसे आप वास्‍तव में हैं!
    तब तक आप सुख, शान्ति और सफलता नहीं पा सकेंगे जब तक आप भ्रम में हैं और अपने आपको स्‍वयं से भिन्‍न समझते रहेंगे।  आप वास्‍तव में क्‍या हैं? यह जानना अनिवार्य है। इसे जाने बिना आपका व्‍यक्तित्‍व निखर ही नहीं सकता। व्‍यक्तित्‍व में निखार ही आपको सफल बना देगा।
    यदि आप प्रतिदिन आत्‍म विश्‍लेषण करते रहेंगे तो आपको यह ज्ञात हो जाएगा कि आप क्‍या है?
    दूसरों की कमियों को सहन कर लीजिए पर उन्‍हें ग्रहण न कीजिए या अपनी कमियों को दूर कीजिए।
    व्‍यक्तित्‍व में सच्‍चा निखार तभी आता है जब आप उसे अन्‍त: या आत्‍मा से बदलते हैं।
    दूसरों का अनुकरण करने की अपेक्षा जो आप को भाता है और आपके व्‍यक्तित्‍व के अनुकूल है उसे ग्रहण कीजिए। अपनी आदतों में वो सब शामिल करना चाहिए जो आपके विचारों के अनुकूल हो, ऐसा करने से व्‍यक्तित्‍व में निखार आता है।
    आप जो वास्‍तव में हैं वैसे ही बन सकते हैं और दूजों का अन्‍धानुकरण सदैव आपके व्‍यक्तित्‍व को आकर्षणहीन बनाता है।
    हृदय से सदैव सरल रहें क्‍योंकि इससे व्‍यक्तित्‍व में निखार आता है।
    अज्ञान को दूर करने के लिए ज्ञान बढ़ाएं क्‍योंकि अज्ञान से भय आता है जबकि ज्ञान से विश्‍वास। अत: ज्ञान बढ़ाएं और उसे व्‍यवहार में लाएं।
    सामाजिक बनें! समाज सेवा का अवसर न गवाएं। अभिव्‍यक्ति के अवसर मिलते हैं। आप में सहनशीलता आती है और आप व्‍यवहार कुशल बनते हैं। अन्‍तत: प्रतिफल में व्‍यक्तित्‍व में निखार आता है।
    व्‍यक्तित्‍व का निर्माण और विकास हो जाने पर सफलता का मार्ग प्रशस्‍त होता है। उन्‍नति के संग यशस्‍वी बनते हैं और सब आपकी प्रतिभा के कायल बन जाते हैं।

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