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मंगलवार, अप्रैल 26, 2011

सफलता चाहिए तो उसका मूल्‍य चुकाइए

        सफलता बिना मूल्‍य चुकाए नहीं मिलती है। सफलता चाहिए तो उसका मूल्‍य चुकाइए। यह जान लीजिए कि सर्वाधिक धैर्य मछियारे के पास होता है। यदि कोई मछली पकड़ना चाहता है और उसके पास धैर्य नहीं है तो वह मछली कभी नहीं पकड़ सकता है, ऐसे में उसका बंसी कांटा खरीदना व्‍यर्थ है। मछियारे का लक्ष्‍य मछली पकड़ना है और यहां उसकी सफलता का मूल्‍य उसका प्रयास और धैर्य है।
    लक्ष्‍य की प्राप्ति में कुछ कठिनाइयां अनुमानित होती हैं जोकि आपको ज्ञात होती हैं कि ये आएंगी और इनका सामना करना ही पड़ेगा। लेकिन यह ध्‍यान रखें कि कुछ कठिनाइयां ऐसी भी आपके समझ आएंगी जिनकी आपको आशा नहीं थी। प्रतिस्‍पर्धा हेतु प्रतिद्वन्द्वियों का सामना तो होगा ही, पर इसके अलावा स्‍वजनों, मित्रों, बन्‍धु-बान्‍धवों या ईर्ष्‍यालू मित्रों के उपहास का भी सामना करना पड़ सकता है। आपके अपने ही आपको निरूत्‍साहित कर सकते हैं। लेकिन आपको इन सब बातों से निरुत्‍साहित नहीं होना है, यदि आप उनसे प्रभावित हो जाते हैं तो समझ लीजिए आप सफलता का मूल्‍य नहीं चुका सकते हैं और सफलता पाने से पूर्व ही असफल हो जाएंगे।
    आप सफलता का मूल्‍य तभी चुका पाएंगे जब आप प्रयत्‍न, उत्‍साह और साहस का समन्‍वय करके अपनी योजना को क्रियान्वित करेंगे और किसी भी कठिनाइए को आता देखकर निराश नहीं होंगे।
    आप अपने लक्ष्‍य की प्राप्ति की योजना में उन्‍हीं क्रिया-कलापों को शामिल कीजिए जो आपके लक्ष्‍य के अनरूप हों। यदि आप अपने सपने के अनुरूप बनाए लक्ष्‍य से भी बड़ा लक्ष्‍य बनाकर प्रयास करेंगे तो आप अपने सपने को तो पूरा कर ही लेंगे। जब आप बड़े लक्ष्‍य को पाने का प्रयास करेंगे तो छोटा लक्ष्‍य तो स्‍वत: पूरा हो जाएगा। पूर्ण समर्पण के साथ, बिना निरुत्‍साहित हुए धैर्य सहित लक्ष्‍य(सफलता) के लिए किए गए समस्‍त प्रयास( जिसमें मार्ग में आने वाली कठिनाइयों से लड़ना भी शामिल है) ही उस सफलता का मूल्‍य है जो आपको चुकाना ही होगा। सफलता का जब तक आप मूल्‍य नहीं चुकाएंगे तब तक आप उसे नहीं पा सकेंगे।

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