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गुरुवार, मई 20, 2010

महिला जातक और राहुफल-सत्यज्ञ



    महिला जातक की कुण्डली में राहु द्वादश भाव में स्थित हो तो क्या फल करेगा और उसका क्या उपाय करें जिससे कष्ट, दुःख एवं संघर्ष की अनुभूति न हो। राहु क्रूर एवं पापग्रह है और परेशान अधिक करता है। आईए जानें कि महिला जातकों की कुण्डली में राहु द्वादश भाव में क्या फल करता है और उसका निदान क्या है।
राहु पहले भाव में हो तो
महिला कुरूप, शील से रहित, रोगी, मान से हीन, क्रोधी व सभी लोगों से त्यागी होती है। जातिका संघर्ष, शारीरिक कष्ट और दुःखी जीवन जीती है। 
दूध से स्नान करना चाहिए। चांदी का चौकोर टुकड़ा गले में धारण करना चाहिए। गेहूँ, गुड़, कांसा मन्दिर में दान करना चाहिए। चांदी के ताबीज में साबुत चावल भरकर धारण करने चाहिएं।
राहु दूसरे भाव में हो तो
महिला धनहीन, दुष्ट पति से युक्त, सुख से हीन, विधवा, रोगिणी, पापकर्मों में लिप्त रहती है। 
महिला को चांदी की ठोस गोली पॉकिट में रखनी चाहिए। तन पर शुद्ध सोना अवश्य धारण करना चाहिए। उत्तर दिशा में चांदी के बर्तन में बहती नदी का जल रखना चाहिए। माथे पर हल्दी या केसर की बिन्दी लगानी चाहिए। दो रंग से अधिक रंग का कम्बल दान करना चाहिए। 
राहु तीसरे भाव में हो तो
महिला भाई-बहिन से हीन, पुष्ट देह से युक्त, शत्राुहन्ता, क्षमाशील एवं रोग रहित होती है। महिला को हाथी दांत की वस्तु घर में नहीं रखनी चाहिए। चांदी के ताबीज में साबुत चावल भरकर धारण करने चाहिएं।
राहु चौथे भाव में हो तो
महिला अल्प धनी, कृतन, जानवरों से प्रीति करने वाली, रोग से कष्ट उठाने वाली, माता के सुख से हीन होती है। महिला को सीढ़ियों के नीचे कभी-कभी रसोई नहीं बनानी चाहिए। कोयला बहते पानी में बहाना चाहिए। भवन की दीवारों के साथ बाहर-भीतर पानी एकत्रा न होने दे।
राहु पांचवे भाव में हो तो
महिला बुद्धिहीन, सामर्थ्यहीन, मोटा मुख एवं बड़े दांतों वाली, व्याभिचारिणी, कांतिहीन, स्वजनों से परित्यक्त एवं दुःखी होती है। पूर्व जन्म के शाप से शापित होने के कारण सन्तान सुख से वंचित रहती है।
चांदी के ठोस खड़े हाथी से प्रतिदिन अपनी गलतियों की माफी मांगे। पति से पुनः विवाह करे। हरिवंश पुराण का पाठ नियमित करना चाहिए।
राहु छठे भाव में हो तो
महिला प्रगल्भ, दयाशील, शत्रुओं को जीतने वाली, अधिक विद्या से युक्त, कठोर प्रशासक, धनधान्य से युक्त, मधुर बोलने वाली और पतिप्रिया होती है। 
रांगे या काले कांच की गोली जेब में रखे। घर की खिड़कियों में काले शीशे लगाए। जेब में प्रतिदिन नया फूल रखे।
राहु सातवें भाव में हो तो
महिला पति सुख से हीन, संघर्षरत, कुरूप, दुष्ट एवं कुकर्मरत, कृपण, कृतन एवं स्वजनों द्वारा त्याज्य होती है। घर में चांदी की ईंट रखे। कुत्ता न पाले। बहते पानी में जटायुक्त नारियल बहाए। चांदी के लोटे में बहती नदी का जल भरकर और चांदी का चौकोर टुकड़ा डालकर उसका पानी कभी सूखने न दे। मांस-मदिरा से बचे।
राहु आठवें भाव में हो तो
महिला शारीरिक कष्ट उठाने वाली, विधवा, कुरूपा, कठोर चित्त वाली, व्याभिचारिणी, लाईलाज रोग से पीड़ित एवं लोक व्यवहार से हीन होती है। 
 ठोस चांदी का चौकोर टुकड़ा पॉकिट में रखे, कोयला बहते पानी में बहाए और सिरहाने मूली रखकर मन्दिर में दान करे।
राहु नौवें भाव में हो तो
महिला धर्म से हीन, दूजे के धर्म को मानने वाली, मांसाहारी, नशा करने वाली, अपमान एवं अपयश पाने वाली, व्यर्थ घूमने वाली और व्याभिचारिणी होती है।
 चने की दाल तीन दिन तक बहते पानी में बहाएं। सिरहाने जौ रखकर प्रतिदिन दान करे। तन पर शुद्ध सोना पहने। संयुक्त परिवार में रहे।
राहु दसवें भाव में हो तो
महिला माता-पिता से हीन, परि से परित्यक्त, स्वजनों की विरोधी, शत्रुहन्ता, क्रोधी, कठोर होती है। पीतल के लोटे में बहती नदी का जल भरकर रखें और कभी सूखने न दें। चुन्नी से सिर ढककर रखे। दूध को उबलने न दे।
राहु ग्याहरवें भाव में हो तो
महिला सुन्दर, विनम्र, पतिप्रिया, भौतिक सुख-साधनों से युक्त, प्रसन्न, नौकर चाकरों से युक्त, सन्तान सुख पाने वाली एवं सुखी होती है। तन पर शुद्ध सोना एवं सिर पर चांदी धारण करे।
राहु बारहवें भाव में हो तो
महिला कुकर्म करने वाली, अपव्ययी, दरिद्र, स्वजनों से परित्यक्त, पति व सन्तान से हीन या उनसे परित्यक्त, नेत्रा रोग एवं रोगग्रस्त होती है। 
लाल टाट की मोटे सौंफ की थैली बनाकर तकिए के नीचे रखे। चांदी के ठोस खड़े हाथी से अपनी गलतियों की माफी मांगे।
    राहु सदैव तीसरे, छठे, दसवें एवं ग्यारहवें भाव में शुभफल देता है। ग्रह के फल में युति व दृष्टि से अन्तर आता है। अतः जब भी फल कहें समन्वय युक्त फल ही कहें। एक ग्रह के आधार पर कहा गया फल असत्य बैठता है। राहु के फल जीवन में अचानक और अधिक मिलते हैं। अशुभ फल अधिक देता है और शुभ फल अल्प देता है।

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