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मंगलवार, मार्च 14, 2017

हम दु:खी क्‍यों हैं !

हम दुःखी क्यों हैं? इस प्रश्न का उत्तर जानने पर ज्ञात होगा कि हम सदैव यह सोचते हैं-हमारे पास धन नहीं है, हमारी बुद्धि तीव्र नहीं है, हमारे शरीर में रोग है, हम व्यवहार कुशल नहीं हैं, शरीर निर्बल है या हमें सांसारिक ज्ञान नहीं है; शायद इसीलिए हम दुःखी हैं। लेकिन सच तो यह है कि ये सब किसी के पास है तो भी वह सन्तुष्ट नहीं है और दुःखी रहता है। नानक जी ने कहा है-'नानक दुखिया सब संसार।' उनके अनुसार तो पूरा संसार ही दुःखी है। यह सच है यदि आप किसी के बारे में कुछ नहीं जानते हैं तो समझ लें कि वह सुखी है। लेकिन जब उसके पास जाकर उसकी कहानी सुन लेंगे तो आपको ज्ञात होगा-अरे यह भी दुःखी है। जिसके विषय में आप नहीं जानते वह सुखी है और जिसके विषय में जान जाते हैं वह दुःखी है।  हम दुःखी इसलिए नहीं हैं कि हमारे पास सबकुछ है या नहीं है। सच तो यह है कि हम इसलिए दुःखी हैं कि हम सबके विषय में या संसार के विषय में बहुत कुछ जानते हैं पर अपने आपको नहीं जानते हैं। यही कारण है कि हम दुःखी हैं। जो स्वयं को जान लेता है वह दुःख मुक्त हो जाता है। जिसने स्वयं को नहीं जाना और सबको जाना तो वह दुःखी है। सत्य तो यही है कि सबकुछ मृत्यु के साथ यहीं रह जाना है तो दुःख किस बात का है।
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