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शनिवार, जून 20, 2009

'जीवन-सत्य'


प्रियजनों,
हाइकु का इतिहास छह दशक पुराना है। हाइकु नामक इस जापानी काव्य विद्या से सर्वप्रथम प्रो.सत्यभूषण वर्मा जी को जाता है जिन्होंने अपने शोध प्रबन्ध 'जापानी हाइकु और आधुनिक हिन्दी कविता' में कराया है। हाइकु छठे दशक के प्रारम्भ में भारत में आया। हाइकु के सफल प्रयोग सर्वप्रथम अज्ञेय ने किए। उन्होंने अपन काव्य संग्रह जोकि 1959 में प्रकाशित हुआ था के खण्ड "एक चीड़ का खाका' में प्रकाशित 27 कविताओं को जापानी कविताओं का अनुवाद कहा है। रवीन्द्र नाथ टैगोर ने अपेन जापान प्रवास के दौरान जापनी हाइकु को विश्व की सबसे छोटी कविता कहते हुए कहा-तीन पंक्तियों की कविता संसार में और कहीं नहीं है। इसका वर्ण विन्यास हाइकु या हाईकु के रूप में दिखता है। जापानी हाइकुकारों ने छठे दशक में ही पांच-सात-पांच के स्थान पर प्रतिक्रिया स्वरूप छह-आठ-नौ अक्षरों का प्रयोग करना प्रारम्भ कर दिया और इसे नव हाइकु या मुक्त हाइकु की संज्ञा दी। हाइकुकारों ने इस जापानी छन्द को तीन पंक्तियों में 5-7-5 अक्षरों के क्रम वाली 17 अक्षरीय अतुकान्त त्रिपदी कविता को स्वीकार किया है। यदि कविता में काव्य पर बल दिया जाए तो हाइकु और हास्य पर बल दिया जाए तो सेनरयु हो जाता है।
मूलतः हाइकु जीवन और प्रकृति के कार्य कलापों की संवेदनात्मक अभिव्यक्ति है जबकि सेनरयु मनुष्य की दुर्बलताओं पर व्यंग्य के छींटे हैं। हाइकु में सरलता है जबकि सेनरयु में हास्य व व्यंग्य की पैनी धार है। हाइकु की मूल प्रेरणा आध्यात्म है। हाइकु में प्रकृति के मानवीकरण को वर्जित माना गया है, क्योंकि हाइकु को सहज अभिव्यक्ति की अलंकार विहीन कविता कहा गया है। वस्तुबोधानुसार हाइकु गागर में सागर है। इसे सूक्त काव्य या सूक्ति काव्य या सूत्र काव्य कहा जा सकता है। हाइकु दैनिक जीवन में अनुभूत सत्य की संक्षिप्त अभिव्यक्ति है। विषयानुसार इस कविता में ऋतु, आकाश, धरती, बुद्ध और देवता, जीवन, वनस्पति, पशु-पक्षी एवं अन्य जीव को अंकित किया गया है।
इस छन्द की ओर मेरा आकर्षण बढ़ा और मैंने डॉ. सुधा गुप्ता द्वारा संपादित एवं लिखित हाइकु को पढ़ा कुछ अन्य कवियों के हाइकु भी पढ़े। तब मैंने सर्वप्रथम अनुभूत जीवन को 'जीवन-सत्य' नामक हाइकु शतक की रचना की। यह कितना सही बन पढ़ा यह तो पाठक ही बताएंगे। सर्वप्रथम इसे ज्योतिष निकेतन सन्देश ब्लोग पर प्रकाशित कर रहे हैं। अच्छी प्रतिक्रिया मिली तो जीवन के अन्य सत्य को अन्य हाइकु के माध्यम से आप तक पहुंचाएंगे।
आपके सुझावों एवं प्रतिक्रयाओं का स्वागत्‌ है।
आपका अपना
डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'


1. ममता
माँ की ममता
खिलता बचपन

जीवन वृद्धि
2. सुख-दुःख
एक सिक्का
दो पहलू उसके
सुख-दुःख हैं
3. रिश्ते
प्रेम की भाषा
उठता भाव-ज्वार
नए रिश्ते
4. अन्तर
नदिया एक
किनारे जिसके दो
अलग ही रहते
5.स्नेह
कच्चा धागा
स्नेह का बन्धन
होता पक्का
6.पहचान
गरीब और
अमीर के मध्य
अन्तर साफ
7.घर
ईट की दीवारें
घर सपनों का है
एक परिवार
8.मृत्यु
मृत्यु क्या?
जीवन का अन्त
नया विकास
9.सपने
धूप का ताप
ऊर्जा की उत्पत्ति
कई सपने
10.समय.
मूक है लाठी
खाली कभी न जाये
समय बली
11.सफलता
असफलता
की कोख से उपजे
सफल सूत्र
12.पुत्री
तनया तो
परायी परछाईं
अलग न हो
13.कर्म
जैसा बोओगे
वैसा काटना होगा
कृत कर्म है
14.मांग
भिक्षुक सभी
दाता के द्वार पर
मांग सदा है
15.भाग्य
कम न मिले
भाग्य से अधिक
चिन्ता क्यों?
16.पुरुषार्थ
करम गति
कोई न टाल पाया
साहस तो भी
17.समर्पण
समर्पण हो
यदि सच सा लगे
प्रभु मिलता
18.जैसा चाहा
दूजों से चाहा
जैसा तुमने कभी
वैसा करो भी
19.अतीत
अतीत देखो
सीखो गलतियों से
खिले जीवन
20.लक्ष्यहीनता
लक्ष्यहीन
भटकता जीवन
अर्थ खोज लो
21.भावुकता
सोचे दिमाग
दिल भावुक होये
विवेकी कौन रहे
22.अभ्यास
सतत्‌ कर्म
अभ्यास की गाथा
बने सुजान!
23.धैर्य
शीघ्रता खोती
धैर्य मीठा है यारों
समझे क्या?
24.स्वार्थ
कौन पराया
जोड़ अपनेपन का
बस स्वार्थ!
25.ज्ञान
ज्ञान का दान
कभी घटता नहीं
संशय दूर
26.मनन
मनन करो
जिज्ञासा बढ़ जाये
अंततः ज्ञान
27.अनुशासन
अनुशासन
जीवन में लाए
प्रबन्धन
28.जीवन
सूर्यादय में
जीवन का संगीत
नूतन राग
29.विश्राम
सूर्यास्त में
विश्राम की डगर
लौटते पंछी?
30.आयु
जीवन यात्रा
आयु का लेखाजोखा
मोक्ष कहां है?
31.दुःख
सुखी कौन है?
जिस घर न झांका
दुःखी संसार
32.समाज
कैसा समाज?
दुःख जब भी बांटा
जग हंसाई
33.स्वार्थ
जिधर देखा
निज उल्लू सीधा
कोई है रोता
34.मंहगाई
मंहगाई है
आटे-दाल का भाव
सत्य ज्ञान
35.सामर्थ्य
निज को जान
योग्यता का भान
कर्मी बन जा ?
36.ऋण
ऋण ही ऋण
साधनों का जीवन
ऐश-आराम?
37.कठिनता
तारे तोड़ना
कठिनता का पाठ
चांद-टुकड़ा
38. आंतकवाद
आंतकवाद
बम के विस्फोट
छाती फटना
39.बलात्कार
बलात्कार
रोगी मन का राग
घना अंधेरा
40.कूप-मंडूक
फतवा कैसा
बेपर की उड़ाना
कूप-मंडूक
41.विवेक
मन का धर्म
मनन-चिंतन है
विवेक बुद्धि
42.जिज्ञासा
जिज्ञासु बनें
ज्ञान तृषा अथाह
विद्वता यहां
43.भेंट
नीच मानुष
वशीभूत होता है
एक भेंट से
44.विनम्रता
भला मानुष
विनम्रता से आए
वश हमारे
45.सत्संग
सुसंग सदा
सुख मिले, हो यश
कुसंग हानि
46.स्वावलंबी
आत्मनिर्भरता
पराश्रयता दुःख
स्वावलंबी बनें
47.कर्म
अकर्म बिना
कुछ नहीं मिलता
कुछ तो करें
48. स्वास्थ्य
तन सेहत
ध्यान किसका है
समयाभाव
49.विवेक
विवेक बुद्धि
धन-यश दिलाये
प्रगति हो
50.अश्रद्धा
श्रद्धाहीनता
लोक-परलोक में
निरर्थक है
51.उपाय
शस्त्र नहीं
उपाय से जीतना
शत्रु को तुम
52.दूरदर्शिता
दूरदर्शिता
संग रहे जब भी
विपत्ति भागे
53.अपरिचित
अपरिचित
अज्ञात प्रवृत्ति हो
आश्रय न दें
54.पराभव
शक्ति अज्ञात
शत्रुता न करना
पराभव हो
55.विद्या
कथन कम
चिन्तन अधिक हो
मिटे अविद्या
56.सच
छुप न पाए
करो चाहे कुछ भी
सच प्रकट
57.अनुशासन
अनुशासन
काज नहीं बनता
नियम-बद्ध
58.सफल सूत्र
बातें कम हों
काम अधिक करो
सफल सूत्र
59.चिंतन
लिखना कम
चिंतन अधिक हो
हटे दुविधा
60.सहनशीलता
सहनशील
सरल बन जाता
प्रस्तर टूटे
61.अधूरा ज्ञान
छलकती है
अधजल गगरी
डींग हांकती
62.व्यवहार
ज्ञान जब भी
व्यवहार में आए
सच हो जाए
63.संगत
होनहार के
होत चिकने पात
संगत अच्छी
64.व्यर्थ
श्वास रहते
कुछ न कर पाए
जीवन व्यर्थ
65.सुकर्म
श्वास छूटते
जमाखर्च होना है
सुकर्म कर
66.वाणी
मधुर वाणी
मन का आपा खोए
दूजे अपने
67.आस
संतान चाहे
माता-पिता से सब
टूटती आस
68.झूठी आशा
हाथ में लाठी
जीवन ढल जाए
दूजों से आशा
69.मूर्ख
काठ का उल्लू
कतराकर जाए
कुछ न पाए
70.निरर्थक संबंध
मीठा अधिक
दांत काटी रोटी हो
चींटे पड़ते
71.जीवनसाथी
जीवनसाथी
एक दूजे के लिए
सांझी है आशा
72.निरर्थकता
जीवन भर
रहे बेपरवाह
पानी पड़ना
73.विकार
पंच विकार
तन-मन मारना
मन भरना
74.मतलब
बिरादरी है
लेकिन अब यहां
मतलब है
75.स्वार्थ
निज ढपली
निज राग सबका
न लेना-देना
76.जैसा चाहो
दूजों से आशा
करना वैसा सदा
पार लगना
77.कुकर्म
पाप कमाना
पानी फिरना सदा
छांह बचाना
78.निराशा
आशा बनती
निराशा जब कभी
छाती फटना
79.लकीर का फकीर
तेली का बैल
लकीर का फकीर
समय खोए
80.व्यर्थता
कूप-मंडूक
तीन कौड़ी का हो
न बनो कभी
81.भाग्य
सागर-मीन
बनकर सदा ही
भाग जगना
82.दंगा
निज स्वार्थ के
सब अंधे मतांध
दंगा-फसाद
83.स्वछन्दता
स्वतन्त्रता
स्वछन्द बन जाये
बाड़ टूटती
84. जग हसाई
दुःख कह के
मुक्त न हुए, हुई
जग हसाई
85.लालच
लालच एक
बला बुरी है, यारों
बच के रह
86.परख
परख सदा
व्यवहार से होती
दोस्ती से नहीं
87.हार
शत्रु को सदा
निर्बल समझना
हार का कारण
88.असंयम
प्रेम-सागर
मन में हिलोरें ले
मन बेकाबू
89.निरोगी काया
पहला सुख
नियम से व्यायाम
कर के देख
90.आत्मविश्वास
अभ्यास करो
इससे बढ़ जाता
आत्मा का बल
91.मृत्यु
जीवन-सत्य
मृत्यु के अंक में
पूर्ण आराम
92.कुछ न अपना
मुट्ठी बंद
गोलोकवासी हुआ
मुट्ठी खुली
93.जल
जल जीवन
संभालो इसको तो
सबके लिए
94.धैर्य
धैर्य जिसका
उसकी हो न हार
सफल सदा
95.सीखना
अभ्यास है
सीखोगे हर पल
प्रगति होगी
96.दुःखी क्यों?
सच जानों भी
सुख-दुःख आ-जा
निराशा क्यों?
97.सफल
जीवन सीख
देता है, सभी को
ली तो सफल
98.मृत्यु
जीवन अंत
अगले जीवन से
पूर्व विराम
99.मोह
मोह किसका?
दुःख का दाता होता
मोह से बच
100.सहयोग
भाव सच्चा
दूजों के लिए होता
साथ मिलता

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(गूढ़ विद्याओं का गूढ़ार्थ बताने वाला हिन्दी मासिक)
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